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राम ही प्रहार हैं

चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है। मनुष्यता को भंग किया, शहर वो वुहान है।। प्रकृति छेड़ता गया, जीव तोड़ता गया। स्वयं पर घमंड किया, मनुष्य ही महान है।। चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।। मनुष्यों के रोग से, मनुष्य डगमगा रहे। हो रही निशा जहां, विद्युत जगमगा रहे।। औषधि विफल सबके, जो भी ज्ञानवान हैं। चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।। मंदिरों के द्वार सभी, बंद खुद करा दिया । मानवों के जीत में, खुद को भी हरा दिया ।। दानवी प्रहार हुआ, बुद्धि भ्रांतिमान है। चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।। सरल राम - राम जपो, राम खेवनहार हैं। कोरोना विषाणु मिटे, राम ही प्रहार हैं।। विधि का ये विधान है, कि ज्योति दिव्यमान है। चित्र भी विचित्र लगे, रोग शक्तिमान है।। ।। ज्योति प्रकाश राय ।।

स्वाति नक्षत्र

बसंत बहार वर्षा ऋतु प्यारी , हरी - भरी बारी फुलवारी। झूले पड़े नीम की डारी , सब पर भारी प्रिय याद तुम्हारी।। दमके - दामिनी मेघ गरजते , सारा - संसार मुग्ध हो घूमे। जहां प्यार रहे जनम- जनम तक , गगन - धारा की रज - रज चूमे।। धरती पर फैले तालाब बहुत , चाहे वह कितना भी निर्मल हो। उसकी प्यास बुझेगी कैसे , जिसके प्यास में नभ जल हो।। प्रकृति रूप छवि सुंदर होगा , स्वाति नक्षत्र जब कल होगा। ऐसे भारत की महिमा पर , क्यों ना मन विह्वल होगा। प्रकृति रूप छवि सुंदर होगा , स्वाति नक्षत्र जब कल होगा।। ।। ज्योति प्रकाश राय ।।

अम्मा

एक ख्वाब सजाया था मैंने, अम्मा का दुःख दूर करूँगा मै।   एक कसम उठाई थी मैंने, अम्मा का कष्ट हरूँगा मै।। जो बीता खेल लड़कपन का, वो ख्वाब मिटाई रातों में।  जिस तरह बढ़ी दुनिया मेरी, वो कसम भुलाई बातों में।।  अपनी खुशियों की खातिर, सबका बलिदान करूँगा मै।  एक ख्वाब सजाया था मैंने, अम्मा का कष्ट हरूँगा मै।। पढ़ने जाता जब विद्यालय, गुरुजन को शीश झुकाता था।   यदि नाम लिया गुरु ने मेरा, मै मन ही मन इतराता था।। वादा था उनसे भी ऐसा, जग में नाम करूँगा मै।  एक ख्वाब सजाया था मैंने, अम्मा का कष्ट हरूँगा मै।। उनके भी वादे भूल गया, अब याद नहीं है नाम उनका।  सद्गुण की शिक्षा लुप्त हुई, लुप्त हुआ परिणाम उनका।।  बचपन की यारी जिन्दा है, छुट्टी के किसी महीनें में।  मिलता नहीं सुकूँ पल भर, परिश्रम के आज पसीने में।। मित्रों से मिलने की कोशिश, फिर से भरपूर करूँगा मै।   एक ख्वाब सजाया था मैंने, अम्मा का कष्ट हरूँगा मै।।  मै किया बसेरा शहरों में, गांव से रिश्ता छूट गया।  जो ख्वाब...

शहीद पुत्र की आश

काश लहू मेरा भी वतन के काम आ जाता। क्या गम था, जो शहीदों में नाम आ जाता।।  शरहदों से आवाज आयी , हो गया अँधेरा दीपक जलाओ  कोई है जो कह रहा संध्या हुई, पुत्र अब तो लौट आओ।।  कल फिर होगी सुबह, दिवाकर तेज हो जायेगा  ओज तुम भरना रगो में, शत्रु तब झुक जायेगा  क्यूँ व्यर्थ चिंतित हो पुत्र ? अब तो तनिक मुस्कुराओ  कोई है जो कह रहा संध्या हुई, पुत्र अब तो लौट आओ।।  आज तेरे तात का, मन बहुत मचल रहा  याद तेरी आ रही, ह्रदय भी अब पिघल रहा  वायु के झोंके से कह कर, सन्देश तुम अपना पठाओ  कोई है जो कह रहा संध्या हुई, पुत्र अब तो लौट आओ।।  सहसा कोलाहल मच गया, गाँव के बाजार में  वाहनों की भीड़ थी, जनशक्ति के सरकार में  माँ कल्पना कर कह उठी, लाल मेरा आ रहा  खुशियों में हवा पागल हुई, या पुष्प वो महका रहा  थाल लाओ आरती की, स्वागत में कोई गीत गाओ  कोई है जो कह रहा संध्या हुई, पुत्र अब तो लौट आओ।।  शरहदों के वीर थे, कुछ थी पुलिस की टोलियाँ  कुछ हाँथ में झण्डा लिये,...

मन के हारे हार, मन के जीते जीत

ईश्वर की कृपा से अगर आपका शरीर क्रियाशील है तो फिर आपको यह कभी नहीं सोचना चाहिए की यह कार्य बहुत कठिन है अथवा यह मुझसे नहीं होगा। आधुनिक युग में मनुष्य ही मात्र वह प्राणी है जो संसार को स्वचलित बनाये रख सकता है। यदि आप किसी कार्यालय में नौकरी करने जाते हैं तो आप वहाँ के बारे में कुछ नहीं जानते रहते हैं, लेकिन मन में यह लगन बनी रहती है की मुझे यह काम करना है तो आप उसे गलत करते हुये भी सही ढंग से करने के प्रयास में लगे रहते हैं और आखिर कार आप उस कार्य में सफल भी हो जाते हैं। सफल होने के लिए आपके विचार आपका मस्तिष्क एक जुट होकर खुद पर विश्वास करते हुये काम करना अति आवश्यक है।  कई बार ऐसा होता है की हम जिंदगी के ऊपर सब कुछ निर्भर कर लेते हैं कि जिंदगी जहाँ चाहे ले जाये, या जो भाग्य में लिखा होगा वही होगा।  इस तरह की कल्पनायें करना भी कायरता कहलाती है, और अगर आपको खुद पर विश्वास है तो आप कायर नहीं हो सकते।  एक बार की बात है प्राचीन काल के राजा चन्द्रगुप्त एक समय मन से हार मान गए थे कि खुद उनकी सेनाओं में विद्रोह हो गया है और वो कुछ नही कर सकते, उस समय उनके ...

प्रभात

चिड़ियों के चहचहाने की आवाज अब आने लगी  जैसे प्रभात हो रहा इस भांति वो जगाने लगी।  सूर्य की किरणों के साथ विश्वास रग में आ रहा  उत्साह संग उमंग रूपी भाव सब पे छा रहा।  भोर बीती दिन चढ़ा अब सूर्य शक्तिमान है  पितु-मातु, गुरु की वंदना करे जो ज्ञानवान है।  आशीष का भागी बने सहयोग सबका कीजिए  पाप-प्याला त्याग कर पुण्य रस को पीजिए।  कर्म जैसा भी करो परिणाम होगा नेत्र में  सद्गुण रहा यदि आप में तो नाम होगा क्षेत्र में।  सीखना है यदि तुम्हे लहरों से जीवन सीख लो  संघर्ष मय जीवन जियो मत किसी से भीख लो।  सीख लो कुछ पर्वतों से जो धूप, वर्षा सब सहे  आँधियों में भी अडिग रहे अपनी व्यथा वो कब कहे।  पौधों से भी कुछ सीख लो फल रखते नहीं अपने लिए  छाया करे निःस्वार्थ वो टहनियों के संग सपने लिए।  सीख लो कुछ ज्योति से अंधेरों को चीरता चले  अमावसी निशा मिटे नन्हा सा जब दिया जले।  विश्वास अब आया रगो में भाव सब पे छा गया  उत्साह संग उमंग लिए सूर्य नभ में आ गया।  ...

होली 2020

आप सभी को रंगो और उमंगो से भरे त्यौहार , होली की ढेर सारी शुभकामनायें  होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!  !! ज्योति प्रकाश राय !!

रिश्ते की परिभाषा

जहाँ प्रेम की अभिलाषा है, वहीं रिश्तों की आशा है।  जहाँ मर्यादा बड़ों को सम्मान देती है  वहीं मानवता सबको ज्ञान देती है  रिश्तों की अपनी एक अलग पहचान होती है।  इसीलिए रिश्तों की डोर सबसे महान होती है।।  भाई - बहन का रिश्ता हो, या माँ - बेटे का नाता हो।  रिश्ता उसी का खूबसूरत है, जो हर पल मुस्कुराता हो।।  भावनाएं जब हो दिल से रिश्ते निभाने की, जरुरत नहीं पड़ती तब पास आने की।  मित्र की मित्रता हो, या अपनों का अपनत्व हो।  जहाँ बात रिश्ते की आये, सबका महत्व हो।।  सूरज का चाँद से हो, या हमारा आपसे हो, हर रिश्ते में एक ज्योति है, एक जिज्ञासा है।  जहाँ हम और आप हैं, वहीं रिश्ता है, रिश्ते की परिभाषा है।।  !! ज्योति प्रकाश राय !!

मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।

मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।  जिस बंधन में पले - बढ़े वो परिवार बना कर रक्खा है।  मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।  उसके आँचल की छाया ही उस नभ-मण्डल से प्यारी लगती है।  दिन-रात करे वो काम भले पर राजदुलारी लगती है।  मेरे खानो की थाली का जूठा भी उसने चक्खा है।  मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।  सावन - भादों की बारिश हो या पूस - माघ का मौसम हो।  या गर्मी जेष्ठ माह की हो या कष्टों में जीवन हो।  मुझ पर आंच न आने पाए इस तरह छुपा कर रक्खा है।  मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।  उस माँ की छाया बन कर आयी बहन हमारी है।  जिसके साथ लड़ूँ - झगड़ूँ पर बातें उसकी प्यारी हैं।  मैंने उसको जीवन का सरकार बना कर रक्खा है।  मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।  देख - भाल करती सबका माँ का हाथ बटाती है।  सुन लेती डाँट बिना गलती के कभी न वह गुस्साती है।  ऐसी सरल - सहज है बहना घर - द्वार सजा कर रक्खा है।  मेरी माँ की ममता ने संसार बना कर रक्खा है।...

भारत बंद

ऐलान करो भारत बंदी का,   मत ध्यान रखो प्रगति की मंदी का। जब-जब मन का गति मंद हुआ, तब-तब यह भारत बंद    क्या नेता यही पढ़ा करते,   या गठबंधन में गढ़ा करते।  कुछ तो करतब दिखलाना है, चलो भारत बंद कराना है। ऐ राजनीति से खेलने वालों, क्या परंपरा को भूल गये।  कुर्बान हुये जो वीर पुरुष, उस लहू, धरा को भूल गये।  मत अपमान करो भारत माँ का, यह देश नहीं इक नारी है।  सुत कुर्बान हुये जिनकी रक्षा में, उस माँ की महिमा प्यारी है।   ऐ सिंहासन के चाहने वालों, क्या मिलता है इस बंदी से।  यदि शिक्षित हो तो मत रोको, बढ़ते कदमो को डंडी से।  मानो कहना संत पुत्र का, यह देश नहीं मेरा घर है।  भारत माँ की जय गूंजेगा, हिन्द देश का प्रेम अमर है।  ।। ज्योति प्रकाश राय।।  https://youtu.be/F9B3J5bGXyo

अपना परिचय

मै जगह आपके दिल में बनाने आया हूँ ,                             महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।  बड़ी दूर का सफर था, मै आप लोगों से बे-खबर था  मीठे अल्फाज सुनने और सुनाने आया हूँ,                              महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ।  जहाँ उद्योग कालीन का छाया है,                                यह शख्स जिला भदोहीं से आया है मै अपनी पहचान बताने आया हूँ,                                महफिलों से कारवां सजाने आया हूँ। यह संत पुत्र , आज मंच पर बोल रहा, दो टूक शब्द जो लिख पाया, उसमे खुद को तोल रहा, निखरेंगे शब्द पंक्तियों से, विश्वास दिलाने आया हूँ                             ...

पुलिस-प्रशासन

यदि आज के युग में भारत सीना तान कर दुश्मनों का सामना करने में सफलता प्राप्त कर रहा है तो वहीं देश को खोखला साबित करने में भी यहाँ की जनता कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है! हालात ये हो गए हैं की राजनितिक दलों को लेकर यहाँ हर कोई मर मिटने को तैयार हो जाता है और इसी तरह से माहौल को और हवा देने में कोई भी कसर नहीं छोड़ने वाली पार्टियाँ भड़काऊ बयान दे कर लोगों में आक्रोश पैदा कर लोगो के जन -जीवन को अस्त-व्यस्त करने में जुटी हुई हैं ! कानून के रक्षक ही आज कानून के भक्षक बने हुए फिर रहे हैं ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे मानवता ख़त्म हो कर क्रूरता के वेश में दैत्य हर किसी को अपने वश में कर लिया हो और जहा चाहे जिसे चाहे नुकशान पंहुचा रहा हो ! हम बात कर रहे है कानून को पैदा करने, कानून को बढ़ावा देने, कानून का सञ्चालन करने वाले हमारे अपने देश की राजधानी दिल्ली शहर की ! एक तरफ जहा घरेलू विवाद या किसी अन्य समस्या को सुलझाने या उस समस्या को सूचित करने के लिए पुलिस चौकी में जाते हैं वही आज पुलिस यह तक देखने के लिए राजी नहीं है की उनके द्वारा चलाये गए पत्थर या हथियार कही किसी ऐसे व्यक्ति को चोट तो नहीं...

एकता दिवस

एकता दिवस आज दिनांक ३१ अक्टूबर है, हम और आप आज के दिन को  एकता दिवस  के रूप में मना रहे है! एकता क्या है ? और इसका अर्थ क्या है ? यह जानना बेहद जरुरी है, आज के समय में बहुत से लोग ऐसे है जिन्हे एकता शब्द तो पता है लेकिन यह किस तरह से हमारे जीवन में कायम रहेगी इसका अनुमान नहीं लगा सकते और अंततः अन्य कोई भी विपरीत व्यक्ति मौके और परिवर्तित समय का लाभ उठा लेता है! एकता का सबसे बड़ा उदाहरण है "अपने आपको अपने परिवार के प्रति समर्पित करना" परिवार वह नाटक का मंच है जहाँ हर व्यक्ति का अपना एक अलग किरदार होता है लेकिन जब सभी पात्र अलग अलग स्वरुप में होते हुए भी एक ही मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करते है तो दर्शक उन सभी कलाकारों को एकता का प्रतीक मानते हैं! यह एकता हमें तब देखने को मिलती हैं जब हम अपने किसी दोस्त को किसी दूसरे व्यक्ति से लड़ते-झगड़ते देख लेते हैं! और यही एकता आज हमें अपने देश के प्रति जागरूक भी बना रही है और कहीं ना कहीं एक अच्छे और सच्चे नागरिक होने का कर्तव्य भी समझा रही है! किन्तु एक होने का यह अर्थ नहीं होना चाहिए की जनसंप्रदाय का जन्म हो जाये, एकता का उदाहरण...

मुंबई पुलिस

कहते है शख्त प्रशासन है, मुंबई शहर के अंदर में यदि इसे प्रशासन कहते है, तो क्या फर्क पुलिस और बन्दर में ? मानवता खो गयी पुलिस की, छा गयी क्रूरता चौकी में इंसान भगा शैतान जगा, छिप गयी एकता खाकी में मुंबई वडाला टी टी क्षेत्र, चौकी में गुण्डाराज बढ़ा विजय सिंह का जीवन हरने, पुलिसों में यमराज चढ़ा  ना बम फोड़ा ना गाय कटी, उसके हाथो जज्बातों से फिर भी वह प्राण हीन हुआ, शासन के घूंसो-लातों से  जब साँस आखिरी उम्मीद आखिरी, पानी का वह मांग करे अंतिम क्षण तक विजय लड़ा, और पुलिस नहीं का राग भरे  आ रही शर्म सरकार राज्य पर, जो कुर्सी-कुर्सी करती है एक अड़े है पांच वर्ष पर, इक आधे-आधे पर मरती है  उस माँ की हालत क्या जाने, सरकार अभी तक सोई है पत्थर हो गए नेत्र ममता के, जो बेटा-बेटा रोई है विश्वास करे अब लोग कहाँ, कैसे कह दे सब ज्ञानी हैं ज्योति प्रकाश की कलम कहे, धरती पर सब मनमानी है तब्दील हो गया विजय सिंह, महाराष्ट्र के अख़बारों में शासन की चौकी से उठ कर, चिपक गया दीवारों में कानून के रक्षक कानून के पालक, तुमसे ही दुनिया चलती है सरकार...

महिमा अपने क्षेत्र की ( जिला भदोहीं )

जिला भदोहीं रंग निराला, कालीन नगर कहावे ! बोली में है प्रेम की भाषा, हर्षित मन हो जावे !! मुख्य कार्यालय और तहसील, "ज्ञानपुर " राजे ! जेल-कचहरी आसपास संग, हरिहर घंटा बाजे !! बाइस मौजा क्षेत्र है मूसी, बसे राय सब ज्ञानी ! रहे अलग पर बनी एकता, एक रहे मृदुबानी !! आगे बढ़ चलो बाजार पुकारे, गोपीगंज हमारा ! सुविधा है संभव सब कुछ, बस और रेल के द्वारा !! जाओ काशी या प्रयाग, या विंध्य धाम तुम जाओ ! निकलो घर से सुमिरि पवन सुत, सुन्दर दर्शन पाओ !! आगे चले जहाँ कुछ, है इतिहास पुराना ! जंगीगंज के शाही सड़क पर, जिसका बना निशाना !! था वीर विजय भान सिंह, सिरोही गांव का वासी ! रक्षा करता रंक समाज का, यूँ बना रहे उदवासी !! लम्बी यह कथा नहीं है छोटी, चलो कदम दो - चार ! नमन करो सेमराध नाथ को, आ गये शिव के द्वार ! लगता श्रावण मास  में मेला, गूंजे बम-बम बोल ! प्रतिदिन आते भक्त यहाँ पे, बजे नगारे-ढोल !! दक्षिण चलें जरा हम देखें, कोनिया बड़ा ही प्यारा ! तीन तरफ से गंगा बहती, जीवन धन्य हमारा !! स्थल सिया समाहित का, करता जग उजियारा ! निक...

जिला भदोहीं

जिला भदोही अपने आप में एक अनोखा शहर है ! जहाँ अपने देश ही नहीं बल्कि विदेशों से बड़े - बड़े कारोबारियों के लिए कालीन बना कर उन्हें निर्यात किया जाता है ! कालीन बनाने की एक अद्भुत कला यहाँ के लोगों में बसी हुई है ! शायद इसीलिए इस जिले को कालीन नगर भदोही नाम के साथ जोड़ा जाता रहा है ! बड़े - बड़े उद्दोगपतियों का यहाँ आना इस छोटे से शहर को गर्व महसूस कराता है ! यहाँ के लोगों की बोली इतनी सुसज्जित होती है की मानो आपको सम्मान दे कर खुद को समर्पित करने के जैसा हो ! भारतीय परंपरा की एक अद्भुत मिसाल केंद्र बिंदु है भदोही, धर्मस्थल की बात करें तो जिला भदोहीं भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है कोइरौना क्षेत्र में विराजमान बाबा सेमराध नाथ धाम जहा प्रतिदिन भजन -कीर्तन करते भक्त लोग नजर आते हैं ! यहाँ भगवान शिव जी पृथ्वी में १२ फिट अंदर विराजते हैं और अपने सभी भक्तों की मनोकामनायें पूर्ण करते हैं ! यहाँ एक और खास जानकारी उपलब्ध होती है आपको, भदोही जिला में ही भारत की सबसे ऊँची हनुमान जी की प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई १०८ फिट है यह प्रतिमा गोपीगंज जी. टी. रोड से होकर धनतुलसी रोड पर स्थित सीत...

कारगिल दिवस

उनको धूल चटा कर हमने झुकने पर मजबूर किया ! जो चौकी तक चोरी से चढ़ आये, उनको चकना चूर किया !! फिर आज विजय दिन भारत का है, झण्डा फिर से लहराना है ! भारत माता की जय बोलो, कारगिल दिवस मनाना है !! जय हिन्द जय भारत ( २६ जुलाई २०१९ ) !! ज्योति प्रकाश राय !! 

यारी प्यार की

हमारे गम में वो शरीक हो ना सके, उस वक्त खुशियाँ बे-शुमार थी वहाँ ! बनाये हम भी थे बड़ी सिद्दत से, महफ़िल के कारवां ! वो लुत्फ़ खुशियों का लेने में मगरूर हो गए यहाँ गम में हम चकना-चूर हो गए जीने का नायाब तरीका हमने भी अपना लिया ! खुद के गम को दिल में दबा कर, उनके संग मुस्कुरा लिया !! !! ज्योति प्रकाश राय !! 

मजा- दिल से दिल तक

मजा जीत में भी है, मजा हार में भी है मजा प्रीत में भी है, मजा प्यार में भी है ! मजा खेल में भी है, मजा जेल में भी है मजा है तो महफ़िल है, मजा मेल भी है ! मजा स्वीकार में भी है, मजा इंकार में भी है मजा इकरार में भी है, मजा इजहार में भी है ! मजा हमारे होठों से हो कर गुजरता है मजा तुम्हारे कानों को छू कर संवारता है ! मजा किसी की नफरतों में भी होता है मजा खुशियों में बिखरता है ! मजा तन्हाई में भी मिलता है, मजा गहराई में भी मिलता है मजा कलियों को छूने में भी आता है, मजा फूलों में भी खिलता है ! मजा खुश रहने के अंदाज में है बस ये जान लो, की मजा हर किसी के राज में है !! !! ज्योति प्रकाश राय !! 

जिंदगी का अफसाना

ऐ महफिलों के शौक रखने वाले , इक दिन खुद महफिल बन जाना है ! कौन यहाँ पर अपना है , कौन यहाँ बेगाना है !! आहट पा कर आने की , जो आज बदलते हैं रहें ! कल आगे पीछे घूमेंगे , देंगे कन्धा देंगे बाहें !! जी लो अपनी दुनिया को , कुछ और नहीं ले जाना है ! कौन यहाँ पर अपना है , कौन यहाँ बेगाना है !! यदि पास नहीं दौलत तेरे , तो क्यूँ तुमको गम होता है ! जिसके घर में भरा खजाना , उसके पास भी गम होता है !! नहीं यहाँ फुरसत में कोई , यही बड़ा अफसाना है ! कौन यहाँ पर अपना है , कौन यहाँ बेगाना है !! मीठे बोल, बोल कर तुम , सबसे हाँथ मिलाना सीखो ! ज्योतिर्मय हो हृदय तुम्हारा , सबको  हृदय लगाना सीखो !! धन से बढ़ कर व्यौहार तुम्हारा , लक्ष्य यही दर्शाना है !! कौन यहाँ पर अपना है , कौन यहाँ बेगाना है !! !! ज्योति प्रकाश राय !!

परिवर्तन

कुदरत ने एक पुस्तक दी है 365 पेज की, जो बराबर है हम सबके एज की ! इसके रचनाकार भी हम और आप होंगे, लिखेंगे वही जो पुण्य और पाप होंगे !! वक़्त की तरह हर पेज खुद बदल जायेगा, जो गया वो फिर कब लौट पायेगा ! कोरे पन्नों पर जिंदगी की जागीर लिख दो, बड़ी सुन्दर हो ये 2019 की पुस्तक, कर्म रूपी कलम से अपने पन की तस्वीर लिख दो !! !! ज्योति प्रकाश राय !! 

बदलते वक़्त की हकीकत

साल ख़त्म हो जाने से जिंदगी ख़त्म नहीं होगी ! सपने टूट जाने से बन्दगी ख़त्म नहीं होगी !! स्वच्छ भारत कह देने से तस्वीर नहीं बदलती ! जब तक विचार नहीं बदलेंगे गन्दगी ख़त्म नहीं होगी !! !! ज्योति प्रकाश राय !!

माँ की याद

ऐ जिंदगी ! फिर से वही बसेरा दे जा कानों में गूंजे बस माँ की आवाजें  फिर से वही सवेरा दे जा !! खुद को समेट छोटा बन जाऊँ  कुछ ऐसी तरकीब बता जा !! फिर माँ के हाथों खाना खाऊं  फिर वही नसीब दिखा जा !! सहलाये माँ जिन हाथों से  फिर से वही ठठेरा दे जा ! ऐ  जिंदगी ! फिर से वही बसेरा दे जा  रात वही फिर हो जाने दे  सब कुछ उसमे खो जाने दे  बस एक कहानी माँ से सुन लूँ  फिर से मुझको सो जाने दे  कानों में गूंजे बस माँ की आवाजें  फिर से वही अँधेरा दे जा ! ऐ जिंदगी ! फिर से वही बसेरा दे जा !! !! ज्योति प्रकाश राय !!

चंचल मन

पंछी से ऊपर उड़ जाऊँ मै आज गगन को चूमूंगा ऐ मुश्किल घड़ियाँ पीछे हट जा मै आज गगन में घूमूंगा !! बह रही पवन में जो खुशबू उसका अहसास जरा कर लूँ दिख रही धरा की सुंदरता नेत्रों से समेट समेट भर लूँ !! ऐ मानव जीवन के प्राणी कद से ऊपर उठ कर देखो हर चछु में सुन्दर छवि है निर्छल मन से सब जग देखो !! कहता है अम्बर सुन प्राणी धरती पर तुझे किनारा है जी चाहे जितना ऊपर उड़ धरती पर तुझे सहारा है !! !! ज्योति प्रकाश राय !! 

Love you Zindagi

किताबों की तरह खोल कर, कर दूँ जिंदगी तेरे हवाले डर लगता है, कहीं तू भी इसका हिस्सा ना बन बैठे ! दिल के सवालों को, दिल में ही रखना बेहतर समझता हूँ डर लगता है, कहीं तू भी किस्सा ना बन बैठे !!

ULJHAN ME JINDAGI

Jinhe apni kismat ki kalam samajhta tha, Aaj vo bhi ruk-ruk kar chal rahe hai ! Kabhi lagta tha mere hausle majboot hai chattano jaise, Kya batau ab kis tarah pighal rahe hai !! !! सारा संसार स्वर्ग - जहाँ प्यार रहे !!

स्वागत शरद ऋतु का

बीत गई है वर्षा ऋतु , शरद सुहावन आई है देश हमारा जगमग होगा , अम्बर से खुशियाँ लाई है लौट रहे श्री राम अयोध्या , सुन्दर - सजग हमारा घर हो करें प्रज्वलित दिये प्रेम के , पवित्र - प्रेम और मन विह्वल हो आप सभी मित्रों को शरद ऋतु ( शरद पूर्णिमा ) की हार्दिक बधाई 

बीते पल

कैसे मान लिया, मै तुमको भुला दूँगा। तुम आज भी जिन्दा हो, मेरे दिल की पनाहों में। ये बात और है की, तुम्हें दिल में सुला कर रखता हूँ। फिर भी हर वक्त जागते हो तुम, मेरी तन्हा निगाहों में ।।

Akanksha prem ki

                                                Daityon par Devtao ki vijay !                                                 Krurta par Namratao ki vijay !!                                                                  Paap par punya ki vijay,                                                                  Jhuth par Vishwash ki vijay,                         ...