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Sirt tum

Mat karna fir kabhi rooth kar jane ki bate
Mere pass ujaale ke roop me " sirf aur sirf tum ho "


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होली 2020

आप सभी को रंगो और उमंगो से भरे त्यौहार , होली की ढेर सारी शुभकामनायें  होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!  !! ज्योति प्रकाश राय !!

बिछड़े रास्ते

 कर रहे थे कत्ल वो सर-ए-आम बाजार में खून की प्यासी दिखी हर चमक तलवार में गिर रहा था सिर कहीं धड़ कहीं पर गिर रहा लेकर बहू ,बेटियों को बाप पागल फिर रहा आतंक का यह शोर था शोर था यह काफ़िरों का मिलता नहीं था रास्ता झुंड था मुसाफिरों का छीन कर भी बन गए वो हमदर्द सारे हिन्द के जो नहीं बोले कभी जय हिंद गुरु गोविंद के भर पेट उनको रोटियाँ देता रहा हिंदोस्तां उनके दिलों में पल रही कुरीतियाँ पाकिस्तां गलतियाँ कर के भी वो ताज पहनाये गए हिंद-ए-वतन के वास्ते घर सभी जलाये गए वो जुर्म की सीमा सभी लाँघ कर बागी हुए तब हिंदुस्तां के जांबाज भी देश में दाग़ी हुए भ्रष्ट होता देख सब करवट लिया फिर देश ने देख कर फिर पात्रता गद्दी दिया उपदेश में राज अब तेरा चले कश्मीर - कन्या छोर तक कर ले जहाँ को कैद तू देख चारों ओर तक हो गए हैं सब सजग ईश्वर भी तेरे साथ है सब पर चढ़ा है रंग भगवा तेज तेरे माथ है झुक रहे हैं वो सभी जो देश को थे खा रहे एक-एक कर के सभी मिटते हुए हैं जा रहे माफ़ी नहीं उनको मिले जो खा गए इंसानियत दण्ड उनको चाहिए जो फैला रहे हैवानियत ज्योति उज्ज्वल हो रहा अपने वतन के वास्ते मिल गए हैं फिर सभी को ...

मै तुम्हारा हूं

अपने दिल में, मेरे प्यार का अहसास रखना सारी कायनात एक तरफ, मैं तुम्हारा हूं, बस इतना विश्वास रखना ये वादियां, ये घटायें, ये मौसम, ये हवायें सब कुछ मैं छोड़ दूंगा, बस मेरा दिल अपने पास रखना मैं तुम्हारा हूं, बस इतना विश्वास रखना ये चांदनी रात , सितारों की चमक ये ठंडी हवायें , फूलों की महक बारिश की बूंदे , सहलाये बदन को जलता बदन , बढ़ाये अगन को क़यामत से लड़ने का, अभिलाष रखना मैं तुम्हारा हूं , बस इतना विश्वास रखना मैं तुम्हारा हूं , बस इतना विश्वास रखना ।। ज्योति प्रकाश राय ।।