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यारी प्यार की

हमारे गम में वो शरीक हो ना सके,
उस वक्त खुशियाँ बे-शुमार थी वहाँ !
बनाये हम भी थे बड़ी सिद्दत से,
महफ़िल के कारवां !

वो लुत्फ़ खुशियों का लेने में मगरूर हो गए
यहाँ गम में हम चकना-चूर हो गए

जीने का नायाब तरीका हमने भी अपना लिया !
खुद के गम को दिल में दबा कर,
उनके संग मुस्कुरा लिया !!


!! ज्योति प्रकाश राय !! 

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