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रिश्ते की परिभाषा

जहाँ प्रेम की अभिलाषा है, वहीं रिश्तों की आशा है। 
जहाँ मर्यादा बड़ों को सम्मान देती है 
वहीं मानवता सबको ज्ञान देती है 
रिश्तों की अपनी एक अलग पहचान होती है। 
इसीलिए रिश्तों की डोर सबसे महान होती है।। 

भाई - बहन का रिश्ता हो, या माँ - बेटे का नाता हो। 
रिश्ता उसी का खूबसूरत है, जो हर पल मुस्कुराता हो।। 
भावनाएं जब हो दिल से रिश्ते निभाने की,
जरुरत नहीं पड़ती तब पास आने की। 
मित्र की मित्रता हो, या अपनों का अपनत्व हो। 
जहाँ बात रिश्ते की आये, सबका महत्व हो।। 

सूरज का चाँद से हो, या हमारा आपसे हो,
हर रिश्ते में एक ज्योति है, एक जिज्ञासा है। 
जहाँ हम और आप हैं, वहीं रिश्ता है, रिश्ते की परिभाषा है।। 

!! ज्योति प्रकाश राय !!

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