Skip to main content

एकता दिवस

एकता दिवस
आज दिनांक ३१ अक्टूबर है, हम और आप आज के दिन को एकता दिवस के रूप में मना रहे है! एकता क्या है ? और इसका अर्थ क्या है ? यह जानना बेहद जरुरी है, आज के समय में बहुत से लोग ऐसे है जिन्हे एकता शब्द तो पता है लेकिन यह किस तरह से हमारे जीवन में कायम रहेगी इसका अनुमान नहीं लगा सकते और अंततः अन्य कोई भी विपरीत व्यक्ति मौके और परिवर्तित समय का लाभ उठा लेता है!
एकता का सबसे बड़ा उदाहरण है "अपने आपको अपने परिवार के प्रति समर्पित करना" परिवार वह नाटक का मंच है जहाँ हर व्यक्ति का अपना एक अलग किरदार होता है लेकिन जब सभी पात्र अलग अलग स्वरुप में होते हुए भी एक ही मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करते है तो दर्शक उन सभी कलाकारों को एकता का प्रतीक मानते हैं!
यह एकता हमें तब देखने को मिलती हैं जब हम अपने किसी दोस्त को किसी दूसरे व्यक्ति से लड़ते-झगड़ते देख लेते हैं! और यही एकता आज हमें अपने देश के प्रति जागरूक भी बना रही है और कहीं ना कहीं एक अच्छे और सच्चे नागरिक होने का कर्तव्य भी समझा रही है! किन्तु एक होने का यह अर्थ नहीं होना चाहिए की जनसंप्रदाय का जन्म हो जाये, एकता का उदाहरण बहुत से जगहों पर जाति और सम्प्रदाय पर भी कायम है जो की मनुष्य को बिना किसी तथ्य को जाने समझे ही गलतियों में शामिल कर देती है और मनुष्य पढ़ा-लिखा होने के बाद भी उसी आग के लपेट आ जाता है जहाँ मानवता का हनन होता है और विद्रोह का जन्म!
हमारे देश में भले ही कुछ राजनितिक दलों में आपसी सहमत ना हो लेकिन जब बात चुनाव की हो तो विपक्षी दल को गिराने के लिए महागठबंधन तक बना ली जाती है! आज भारत देश जिस परिस्थिति में अन्य देशों के सामने खुद को खड़ा कर पाया है वह भारतीय लोकतंत्र में एकता का सबसे बड़ा प्रतीक मना जा रहा है!
यदि आप किसी समूह से खुद को जोड़े हुए रखेंगे तो आप निश्चय ही अन्य किसी के मुकाबले मजबूत अवस्था में होंगे, आज भारत का शक्ति प्रदर्शन देख जहाँ पाकिस्तान तिलमिला उठता है वही चीन भी गंभीर अवस्था में नजर आता है! और किसी भी पड़ोसी देशों में कुछ भी कह पाने की हिम्मत नहीं हो रही है यह भी हमारे देश की जनता और राजनितिक दल की एकता का ही परिचय है!
देश में अलग-अलग भाषा और अलग परम्पराओं को एक में समेटे हुए हमारा भारत आज उन्नति के जिस रास्ते पर पंहुचा है यह देख पूरी दुनिया आश्चर्य चकित है! भारतीय जनता पार्टी आज देश की सबसे बड़ी पार्टी बन कर एकता और अखण्डता उदाहरण प्रस्तुत की है! राजनितिक एकीकरण हेतु ही आज भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिवस को हमारे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने ३१ अक्टूबर को एकता दिवस के रूप में मनाये जाने हेतु दिनांक ३१ अक्टूबर २०१४ को स्थापना किया ! अतः आप सभी से अनुरोध है की अपने मित्र, परिवार और गांव तथा देश के प्रति हमेशा सजग और सरल रहें साथ ही खुद पर अटल विश्वास और मन में सफलता की ज्योति प्रकाशित करें! आपका व्यौहार ही आपके समूह में एकता बनाये रखने का मुख्य साधन होगा धन्यवाद !

Comments

Popular posts from this blog

होली 2020

आप सभी को रंगो और उमंगो से भरे त्यौहार , होली की ढेर सारी शुभकामनायें  होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!  !! ज्योति प्रकाश राय !!

बिछड़े रास्ते

 कर रहे थे कत्ल वो सर-ए-आम बाजार में खून की प्यासी दिखी हर चमक तलवार में गिर रहा था सिर कहीं धड़ कहीं पर गिर रहा लेकर बहू ,बेटियों को बाप पागल फिर रहा आतंक का यह शोर था शोर था यह काफ़िरों का मिलता नहीं था रास्ता झुंड था मुसाफिरों का छीन कर भी बन गए वो हमदर्द सारे हिन्द के जो नहीं बोले कभी जय हिंद गुरु गोविंद के भर पेट उनको रोटियाँ देता रहा हिंदोस्तां उनके दिलों में पल रही कुरीतियाँ पाकिस्तां गलतियाँ कर के भी वो ताज पहनाये गए हिंद-ए-वतन के वास्ते घर सभी जलाये गए वो जुर्म की सीमा सभी लाँघ कर बागी हुए तब हिंदुस्तां के जांबाज भी देश में दाग़ी हुए भ्रष्ट होता देख सब करवट लिया फिर देश ने देख कर फिर पात्रता गद्दी दिया उपदेश में राज अब तेरा चले कश्मीर - कन्या छोर तक कर ले जहाँ को कैद तू देख चारों ओर तक हो गए हैं सब सजग ईश्वर भी तेरे साथ है सब पर चढ़ा है रंग भगवा तेज तेरे माथ है झुक रहे हैं वो सभी जो देश को थे खा रहे एक-एक कर के सभी मिटते हुए हैं जा रहे माफ़ी नहीं उनको मिले जो खा गए इंसानियत दण्ड उनको चाहिए जो फैला रहे हैवानियत ज्योति उज्ज्वल हो रहा अपने वतन के वास्ते मिल गए हैं फिर सभी को ...

रास्ट्र गीत

राष्ट्र गीत ऐ हिन्द के वीर जवानों अपनी ताकत को पहचानों आ जाए अगर बैरी रण में तुम हार कभी मत मानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों जिसे ओढ़ कर चढ़े भगत सिंह फाँसी वाले फंदे पर कोशिश करना आंच न आए विजयी विश्व तिरंगे पर तुममें कितनी ताकत है तुम आज बता दो दीवानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों छोटे बच्चे जब जब बोले भारत मां का जयकारा अपना भारत ऐसे चमके जैसे चमके ध्रुव का तारा धरा गगन को एक करो तुम बो कर बीज किसानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों देखे दुनिया शौर्य वतन का यह अपनी अभिलाषा हो शान कभी ना झुकने पाए हर मन में यह आशा हो है अपना अनमोल तिरंगा इसको सब पहचानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों जहाँ हिमालय शीश उठाए अम्बर तक चढ़ जाता है ऐसे भारत का विचार अपने संस्कृति पर इतराता है कहे ज्योति तुम भी सीखो ऐ दुनिया भर के इंसानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों ज्योति प्रकाश राय (भदोही, उत्तर प्रदेश)