जब निम्न स्तर पर स्वर्ग लगे
और शून्य लगे यह जग सारा
तब समझो दिल का रोग लगा
अब क्या जीता और क्या हारा
अब वही दर्द और वही दवा
और वही वैद्य बनकर डोले
जग कुछ बोले मै कुछ बोलूँ
मन कुछ बोले वो कुछ बोले
हूँ नही किसी का साथी अब
और नही रहा जब बेचारा
तब समझो दिल का रोग लगा
अब क्या जीता और क्या हारा
क्यूँ कभी कभी यह लगता है
यह गगन उसी का हिस्सा है
मै उसका जीवन किस्सा हूँ
वो मेरा जीवन किस्सा है
जब उसने अपना दिल सौंपा
मै भी जब उस पर दिल वारा
तब समझो दिल का रोग लगा
अब क्या जीता और क्या हारा
ज्योति प्रकाश राय
भदोही, उत्तर प्रदेश
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