Skip to main content

Posts

दंगा

 अब कौन मौन रह सकता है किसका रक्त नही डोलेगा तू ही बतला ऐ हिंदुस्तां क्या अब भी भक्त नही बोलेगा धर्म भक्त और देश भक्त दोनों ने मन में यह ठाना है अपना अस्तित्व न गिर जाए मिल कर हमे बचाना है क्या संविधान के नियमों का पालन हमको ही करना है क्या एक गाल खा कर थप्पड़ दूजा भी आगे करना है चुप चाप सहें और सुने गालियाँ क्या यही धर्म हमारा है आगे बढ़ कर रण लो वीरों दुश्मन हमको ललकारा है उठने लगे हैं हाथ जहा भी उन हाथों को वही मरोड़ो तुम घर में रह कर जो आँख दिखाये उसे नही अब छोड़ो तुम ध्यान करो माँ काली का शिव के त्रिशूल का ध्यान करो माथे तिलक धैर्य व साहस खुद को फिर से बलवान करो सुलग रहा है देश जिधर उस ओर मेघ बन छा जाओ हाहाकार मचा कर पल में शत्रु शक्ति को खा जाओ चहुँ ओर क्रूरता जो फैली अपने ही अपनो से हारे हैं देखो सब वही दरिंदे हैं जो भारत पर पत्थर मारे हैं धैर्य से ऊपर उठकर अब सरदार पटेल सा जोश भरो जय जय श्री राम के नारों से दुश्मन को तुम बेहोश करो गुंजायमान हो नभ मंडल हनुमत हुन्कार भरो वीरों जिस ओर बढ़ो लहरा दो भगवा बैरी संहार करो वीरों जन्नत मिल जाए इन्हे अभी राणा प्रताप सा बढ़ जाओ लेकर भा...

पर्यावरण ( प्रकृति)

 उस दिन सब जगह पट जाएगा जिस दिन हर वृक्ष कट जाएगा क्या इस जग को वही देखना है या जीवों को मार कर फेकना है ना रहेंगे पेड़ ना बहेगी ठंडी हवा हर तरफ दिखेगी बस गंदी फिजा सोचो क्या दुनिया का नजारा होगा हर तरफ हर आदमी बेसहारा होगा यह प्रकृति है इसमें जीवन समाया है इसी ने सजीवों का यौवन बनाया है प्रकृति से ठिठोली भारी पड़ रहा है भले क्यूँ ना इंसान आगे बढ़ रहा है स्वार्थ में हर व्यक्ति ऐसे घुल चुका है जैसे डाली में हर फूल खिल चुका है अब कभी न मिलने की जरूरत होगी बार बार ना खिलने की जरूरत होगी जब तेज आधियों में सब खो जाएगा तब मनुष्य जो किया सब याद आएगा जब पर्यावरण बचाना सरल नहीं होगा तब इन प्रश्नों का कोई हल नहीं होगा कभी तेज बारिश तो कभी धूप होगी तब हँसी वादियाँ बेहद कुरूप होगी न हो भविष्य ऐसा अपना हो या बेगाना लगा कर पेड़ पौधा प्रकृति को है बचाना ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

गजल

 काव्योदय रदीफ़ - कर लिया मैंने ग़जल इन निगाहों में एक ख़्वाब भर लिया मैंने ख़ुद से ही ख़ुद का हिसाब कर लिया मैंने उनको देखे बिन तब दिन नही गुजरता था अब तस्वीरों को ही गुलाब कर लिया मैंने एक प्यारा सा चेहरा दिल में बसाये फिरता हू यूँ चेहरे को दिल-ए-मेहताब कर लिया मैंने ये दुनिया शिकायती आकाओं से भरी हुई है इसी लिए दिल-ए-आफ़ताब कर लिया मैंने लोग दौलत से हैं या दौलत है लोगों के लिए इसी तमन्ना में ख़ुद से हिजाब कर लिया मैंने अब ना रही कोई ख़्वाहिश ना आरजू है कोई मोहब्बत-ए-दौर में भी नका़ब कर लिया मैंने अब ना देखो ना दिखाओ ज्योति ज़ख़्मों को यूँ ही नहीं नाम अपने ख़िताब कर लिया मैंने ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

पुरुष

 आती है जब मुश्किल घड़ियाँ पुरुष नही घबराता है बनकर कठोर हृदय वाला कठिन समय से टकराता है मार समय की कौन है सहता कौन धरा पर ऐसा है सोच सोच कर कठिन परिस्थिति ईश्वर गढ़ता जाता है आती है जब मुश्किल घड़ियाँ पुरुष नही घबराता है आँख भले ही नम हो जाए गिरता नही निगाहों से आहे भर भर सहता सब कुछ लड़ता स्वयं गुनाहों से आँच न आए परिजन पर वह झुक कर शीश उठाता है आती है जब मुश्किल घड़ियाँ पुरुष नही घबराता है देख परिस्थिति को अपने अर्जुन थे सब कुछ छोड़ रहे बन कर महान फिर से माधव पुरुष धर्म से जोड़ रहे विचलित मन से आगे होकर पुरुष ही चक्र उठाता है आती है जब मुश्किल घड़ियाँ पुरुष नही घबराता है वह भी एक पुरुष ही था जो दानवीर कहलाया है न्यौछावर कर प्राण स्वयं पुरुषों का मान बढ़ाया है हुआ भूमिगत जितना पहिया वह उतना उठता जाता है आती है जब मुश्किल घड़ियाँ पुरुष नही घबराता है ऊँचे - ऊँचे शिखरों के अंदर जो राह बना डाले जिनकी तलवारें तेज चलें हिम्मत से चलते थे भाले वह वीर शिवा रण लेकर बैरी को मार भगाता है आती है जब मुश्किल घड़ियाँ पुरुष नही घबराता है कभी काटता समय को अपने कभी समय कटवाता है कभी पाटता कर्ज...

जीवन और प्रेम

जहाँ है प्रेम की गंगा  वहीं जीवन की धारा है जिसे रब ने  संवारा है  उसे किसने बिगारा है चलो अविरल बहाएँ हम जहां में प्रेम की गंगा जहाँ हो प्यार की पूजा वहीं सबका गुजारा है करो नफ़रत  करो पूजा ये दुनिया रीत से चलती मुसाफ़िर तुम मुसाफ़िर हम उमर है प्रीत में पलती किसी की चाह में इतना नही होना कभी भी गुम खुदा की देन है जीवन नही मागे से फिर मिलती जुदा होकर भी तुम अक्सर मेरे ख्वाबों में आते हो जो गाये  गीत थे  संग में  वही तुम गुनगुनाते हो सजा कर राग जीवन का चले जाना नही अच्छा जो सबसे हम बताते हैं वो सबसे तुम छुपाते हो किसी को पा नही सकते किसी के हो ही जाओ तुम समर्पण  भाव है  ईश्वर  मोहब्बत भी निभाओ तुम नही देखो  मुनाफा  क्या है  जीवन - प्रेम में  यारों बनो सागर  रहो शीतल  मधुर जीवन बिताओ तुम है जीवन प्रेम का दर्पण यहाँ खुद को उतारो तुम जो रूठे हैं अभी तुमसे उन्हें फिर से पुकारो तुम ये जीवन  प्रेम का  प्यासा इसे तन्हा नही जीना जला कर ज्योति अंतर्मन सभी जीवन संवारो तुम ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश...

निबंध

विषय- राजा राम मोहन राय का आंदोलन, सामाजिक शोधन की कसौटी राजा राम मोहन राय ने सामाजिक सुधार के लिए कई कदम उठाए और आंदोलन भी किए जिनमें मुख्यतः पाँच आंदोलनों के चलते समाज को एक नई दिशा मिली और भारत देश को प्रगति करने का अवसर प्राप्त हुआ। आंदोलन 1- बाल विवाह राजा राम मोहन राय ने कई वर्षों से चली आ रही बाल विवाह की प्रथा को कुप्रथा साबित कर उसका विरोध किया और बाल विवाह का शिकार होने वाली स्त्री जाति के रक्षक बन समाज में महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने में सहायक बनें। 2- मूर्ति पूजा राजा राम मोहन राय घर में पूजा पाठ होते अक्सर देखा करते थे किन्तु उन्हें कभी ईश्वर के स्पष्ट दर्शन नहीं होने के कारण ही वो अलग अलग मूर्तियों में एक ही ईश्वर को देख पाना गलत समझते थे और यही कारण था कि उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया था।  3- बहु विवाह राजा राम मोहन राय दूर दृष्टि वाले महान व्यक्ति थे जिन्होंने भारत देश में चारों ओर फैलते अंधकार को देखा और कई कुप्रथाओं में से एक बहु विवाह को समाप्त करने पर जोर दिया (विरोध किया)। बहु विवाह एक ऐसी प्रथा थी जिसमें कोई भी व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष एक से अ...

पानी

 हो गई बंजर ज़मी और आसमां भी सो रहा पानी नही अपने यहाँ हाय यह क्या हो रहा युगों युगों से देश में होती नही थी यह दशा व्यर्थ जल बहाव में आज आदमी आ फसा पशु पक्षियों में शोर है संकट बहुत घनघोर है देखे नही फिर भी मनु लगता अभी भी भोर है बूंद भर पानी को व्याकुल बाल जीवन हो रहा पानी नही अपने यहाँ हाय यह क्या हो रहा उनको नही है पता जिनके यहा सुविधा भरी देख ले कोई उन्हे खाली है जिनकी गागरी बहे जहा अमृत की गंगा यमुना नदी की धार है उस नगर उस क्षेत्र में भी पेय जल में तकरार है सो गई इंसानियत रुपया बड़ा अब हो रहा पानी नही अपने यहाँ हाय यह क्या हो रहा अब भी नही रोका गया व्यर्थ पानी का बहाना होगा वही फिर देश में जो चाहता है जमाना संदेश दो मिल कर सभी पानी बचाना पुण्य है पानी नही यदि पास में तो भी ये जीवन शून्य है पानी बचे जीवन बचे ज्योति उज्ज्वल हो रहा ईश्वर करे आगे ना हो व्यर्थ जो कुछ हो रहा ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

पुलवामा अटैक

अपने हौसलों को कमजोर ना समझो, इनमें जज्बा है कुछ कर दिखाने का वक्त आए तो गर्व से कहना, हममें हिम्मत है जाँ लुटाने का ऐ भारत माँ तेरे चरणों की सौगंध, गर कोई तेरी ओर आँख भी उठाए, तो हममें हिम्मत है उसकी हस्ती मिटाने का दुश्मनों को घर तक खदेड़ आने का हौसला हममें है देश पर शौक से मिट जाने का हौसला हममें है याद रखो पाक के नापाक जवानों, तुम्हे मिट्टी में मिलाने का हौसला हममें है कारगिल का दौर फिर से दोहराने का हौसला हममें है फिर लाहौर तक चढ़ जाने का हौसला हममें है मंजर क्यूँ आज भयावह है, क्या यही शांत कश्मीर है हम तो वीरों में वीर बड़े, क्या लाशें ही जागीर हैं जिन हसी वादियों में खिलती, पवित्र प्रेम की कलियाँ है है धरा वहाँ क्यूँ लाल रंग, बिखरी बिछड़ी सब गलियाँ है हम तो देते संदेश प्रेम का, क्या उन्हें नही लेना आता या जिस संदेश को वो पहचाने वो हमें नही देना आता हम भी तो ज्ञान बाटते हैं, क्यूँ ना उनको हम पहचाने आखिर कब तक मित्र कहें, हरकत क्यूँ ना हम जाने ऐ भारत माँ के वीर जवानों, चालीस को कैसे खो बैठे कारगिल की याद दिलाओ उनको, जो छुपे वहाँ ऐठे-ऐठे लश्कर के हो या हिजबुल के, है तो कायर और गीदड...

बिछड़े रास्ते

 कर रहे थे कत्ल वो सर-ए-आम बाजार में खून की प्यासी दिखी हर चमक तलवार में गिर रहा था सिर कहीं धड़ कहीं पर गिर रहा लेकर बहू ,बेटियों को बाप पागल फिर रहा आतंक का यह शोर था शोर था यह काफ़िरों का मिलता नहीं था रास्ता झुंड था मुसाफिरों का छीन कर भी बन गए वो हमदर्द सारे हिन्द के जो नहीं बोले कभी जय हिंद गुरु गोविंद के भर पेट उनको रोटियाँ देता रहा हिंदोस्तां उनके दिलों में पल रही कुरीतियाँ पाकिस्तां गलतियाँ कर के भी वो ताज पहनाये गए हिंद-ए-वतन के वास्ते घर सभी जलाये गए वो जुर्म की सीमा सभी लाँघ कर बागी हुए तब हिंदुस्तां के जांबाज भी देश में दाग़ी हुए भ्रष्ट होता देख सब करवट लिया फिर देश ने देख कर फिर पात्रता गद्दी दिया उपदेश में राज अब तेरा चले कश्मीर - कन्या छोर तक कर ले जहाँ को कैद तू देख चारों ओर तक हो गए हैं सब सजग ईश्वर भी तेरे साथ है सब पर चढ़ा है रंग भगवा तेज तेरे माथ है झुक रहे हैं वो सभी जो देश को थे खा रहे एक-एक कर के सभी मिटते हुए हैं जा रहे माफ़ी नहीं उनको मिले जो खा गए इंसानियत दण्ड उनको चाहिए जो फैला रहे हैवानियत ज्योति उज्ज्वल हो रहा अपने वतन के वास्ते मिल गए हैं फिर सभी को ...

नारी (स्त्री)

 विषय - नारी ( स्त्री ) रग रग में जिसके ममता है कण कण में बसी छवी जिसकी वह माता भी इक नारी है क्या कल्पना करे कवी इसकी नारी गीता नारी गंगा नारी पृथ्वी सब ओज रही नारी है तो जीवन है फिर क्यूं सब पर बोझ रही युगों युगों की बात करूं क्या अमर वीरांगना भूला कौन मणिकर्णिका बढ़ी बनारस हुंकार युद्ध का भूला कौन नाम था जिसका लक्ष्मीबाई भारत मुक्त कराने आई लोहा लिया फिरंगी संग देश पर अपनी जान लुटाई आश्रित है जग जीवन जिसपर वह प्रकृति स्त्री में आती है यदि धरा धरोहर हम समझे वह जीवन सरल बनाती है इतिहास भरा है स्त्री से आकाश कल्पना चढ़ धाई प्रधान इंदिरा गांधी पहली पाटिल राष्ट्रपति बन आयी महिलाओं का परचम लहराया जब दौड़ लगाया बेटी ने भारत का मस्तक नभ छाया जब रौब जमाया बेटी ने स्वर्ण पदक और विजय तिलक सब पर अधिकार जमाना सीखा स्त्री नहीं अधीन किसी के रण में कौशल दिखलाना सीखा मिर्ज़ा नेहवाल देश का गौरव सिंधु जीत की परिभाषा स्त्री को उचित सम्मान मिले यह ज्योति करे सबसे आशा बस प्यार चाहिए यथा उचित अनुशासन नहीं भंग होगा घर घर सम्मान मिले स्त्री को पुरुष नहीं बदरंग होगा।। नाम - ज्योति प्रकाश राय पिता - श्री ...

विजय रस

 हिंदुस्तां के सरहद पर जब देश का वीरा बोलेगा लहरायेगा गगन तिरंगा मन मस्त मगन हो डोलेगा सूर्य देव के किरणों से रग-रग में तेज समायेगा भारत माता का जयकारा बच्चा-बच्चा दोहरायेगा देश द्रोहियों घुसपैठों का पुर्जा - पुर्जा खोलेगा हिंदुस्तां के सरहद पर जब देश का वीरा बोलेगा भ्रष्टाचारी गद्दारों अब अंतिम चरण तुम्हारा है अंत हुआ त्रैलोक विजेता श्री राम प्रभू ने मारा है सुनो कमलनयन अब अपनी पंखुड़िया खोलेगा हिंदुस्तां के सरहद पर जब देश का वीरा बोलेगा आजादी की चाहत में जिस जिस ने प्राण गवाये हैं याद उन्हें भी कर लो जो जीवित ना रह पाए हैं देश के खातिर अडिग रहेंगे हृदय कभी ना डोलेगा हिंदुस्तां के सरहद पर जब देश का वीरा बोलेगा जलिया वाला बाग देख कर मन में रोष उभरता है देख देश की आजादी पल भर में जोश निखरता है तब आजादी के प्यालों में ज्योति विजय रस घोलेगा हिंदुस्तां के सरहद पर जब देश का वीरा बोलेगा ज्योति प्रकाश राय भदोही उत्तर प्रदेश

रास्ट्र गीत

राष्ट्र गीत ऐ हिन्द के वीर जवानों अपनी ताकत को पहचानों आ जाए अगर बैरी रण में तुम हार कभी मत मानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों जिसे ओढ़ कर चढ़े भगत सिंह फाँसी वाले फंदे पर कोशिश करना आंच न आए विजयी विश्व तिरंगे पर तुममें कितनी ताकत है तुम आज बता दो दीवानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों छोटे बच्चे जब जब बोले भारत मां का जयकारा अपना भारत ऐसे चमके जैसे चमके ध्रुव का तारा धरा गगन को एक करो तुम बो कर बीज किसानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों देखे दुनिया शौर्य वतन का यह अपनी अभिलाषा हो शान कभी ना झुकने पाए हर मन में यह आशा हो है अपना अनमोल तिरंगा इसको सब पहचानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों जहाँ हिमालय शीश उठाए अम्बर तक चढ़ जाता है ऐसे भारत का विचार अपने संस्कृति पर इतराता है कहे ज्योति तुम भी सीखो ऐ दुनिया भर के इंसानों ऐ हिंद के वीर जवानों ऐ हिंद के वीर जवानों ज्योति प्रकाश राय (भदोही, उत्तर प्रदेश) 

प्रश्न

 चार महीने की ये मोहब्बत, फिर बंजर कर के जाना सुन बादल तू ही बतला धरती पर क्या आरोप लगाना तेरे विरह की पीड़ा में किस तरह जिस्म झुलसाते हैं प्रेम किए जो नदी - नहर सब तुझमें सिमटते जाते हैं तेरे प्रेम के कारण ही दुनिया को अपनी गहराई बताना सुन बादल तू ही बतला धरती पर क्या आरोप लगाना काले रंग की क्या शोभा जो पक्षी भी पागल फिरते हैं बोले पपीहा मोर नाचते वन उपवन हिलते डुलते हैं सुन सबकी अभिलाषा सबके हृदय अनुराग जगाना सुन बादल तू ही बतला धरती पर क्या आरोप लगाना क्या है तेरी आवाजों में क्यूँ सुनकर बेचैनी बढ़ती है क्यूँ विरहन पिय बिन पागल हो करवट खूब बदलती है तन मन की और रन वन की काम है तेरा आग बुझाना सुन बादल तू ही बतला धरती पर क्या आरोप लगाना बस तेरे एक बूँद को पा कर कैसे उपवन खिलता है आ देख कभी इस धरती पर कैसे जीवन मिलता है स्वार्थ से तू आता जाता फिर क्या तुझसे प्रीत लगाना सुन बादल तू ही बतला धरती पर क्या आरोप लगाना ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

भोजपुरी गीत

लड़का जाने कवने कलम से भगिया लिखाइल मिल के हम तोहरा से मिल नाही पाइल हमारा पे तोहरा के केतना गुमान रहल जाने न जाने दिल केतना नादान रहल तोहरे जिनगिया के बिगारि हम आईल मिल के हम तोहरा से मिल नाही पाइल याद जब आवेला तोहरा मिलन हो आँख भरि जाला करी का जतन हो लागे ला अइसन जईसे नदी बा समाइल मिल के हम तोहरा से मिल नाही पाइल खुशिया मिले तोहके हमे मिली गम हो राम करे तोहरा पे अइसन करम हो गइल नाही हमसे पिरितीय निभाईल मिल के हम तोहरा से मिल नाही पाइल अँखिया से तोहरे न आवे कभो पानी आज खत्म कइदेब आपन जिंदगानी फिर से सुरतिया न तोहके देखाइल मिल के हम तोहरा से मिल नाही पाइल ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश लड़की तोहरा के देखले से मिले ला सुकून हो बिना तोहरे देहियाँ मे खून नाही खून हो तोहरे ना रहले से हमसे ना रहाइल मिल के हम तोहरा से मिल नाही पाइल

बेटियां

प्रकृति संचार बेटियां सृष्टि अधिकार बेटियां नूतन आकार बेटियां प्रीत स्वीकार बेटियां जब गूंजती हैं किलकारियां बेटियों के रूप में मन मुग्ध होते हैं सभी देख भवानी स्वरूप में खिलती कली हैं बेटियां बगिया बहार बेटियां चंचल गली हैं बेटियां निर्मल विकार बेटियां बेटियां ही जग सृष्टि हैं बेटियां ही हिय दृष्टि हैं न ही किसी मन की व्यथा ना ही अनाशिष्ट हैं घर से विदा होती हैं जब बारात के संग बेटियां लेकर चली जाती हैं सब जज्बात संग बेटियां पूज्यमान हैं बेटियां तिरस्कार मत करना कभी पुष्प ही देना सदा काँटों को मत भरना कभी आती हैं जब बन कर बहू उपहार संग बेटियां मानों प्रफुल्लित हो उठी घर द्वार संग बेटियां स्वर्ग से सुंदर बनाती प्रेम से हर रिश्ते निभाती हो नही घर में अंधेरा ज्योति से ज्योती जलाती हैं सहज सुंदर सरल जलधि आकार बेटियां गीता गंगा सी पवित्र हैं सोलह श्रृंगार बेटियां कर लो अब स्वीकार सब जीवनाधार बेटियां आशीष दो कीर्तिमान हों ज्योति दुलार बेटियां ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

भजन

मोह अपने भगत से लगा लेना राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम उसके आँखों में तेरी छवी है बसी उसके आँखों में तेरी छवी है बसी तुझे देखे तो होवे जो बिगड़े हैं काम वो तो जपता है राम राम राम राम राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम उसके जीवन की अनमिट कहानी हो तुम उसके जीवन की अनमिट कहानी हो तुम तुमसे होता सब शुरू तुम पे होवे है विराम वो तो जपता है राम राम राम राम राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम आओ आओ सियापति लखण के सहित आओ आओ सियापति लखण के सहित हम सब करते हैं तुमको हृदय से प्रणाम वो तो जपता है राम राम राम राम राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम मोह अपने भगत से लगा लेना राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम वो तो जपता है राम राम राम राम राम ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

अटल जी

 अटल जी कहानी है अटल की ही बानी है अटल आज जानिए अटल भूमि भारत हैं अटल कर्म धारक हैं अटल आज मानिए अटल तेज ज्योती हैं अमूल्य अटल मोती हैं अटल प्रेम पालिए अटल राष्ट्र भक्ति हैं अटल हिंद शक्ति हैं अटल को संभालिए अटल हिंद धारा हैं हिंद को संवारा है अटल हिंद कवि पुकारिये अटल बम की ऊर्जा हैं पोखरण की पुर्जा हैं कवि को रवि पुकारिये अटल धैर्य धारक थे भ्रष्ट के संहारक थे अटल मित्र की कथा अटल राष्ट्र नेता थे शत्रु पर विजेता थे अटल चरित्र की जथा अटल प्रेम दर्पण थे राष्ट्र को समर्पण थे अटल मात्र एक थे चौबीस दल के वंदन थे कृष्ण कृष्णा के अटल पात्र एक थे अटल गुण के ज्ञानी थे अटल स्वाभिमानी थे अटल धैर्यवान थे अटल देशभक्त थे अटल सख्त सख्त थे अटल युग महान थे अटल हिंद बालक थे अटल हिंद रक्षक थे अटल अविराम हैं अटल भी पितामह थे अटल संघ रक्षक थे अटल को प्रणाम है

हिंदी

 लिखेगा क्या कोई तुझको तू कविता है कहानी है कभी कवियों की बोली है कभी खुसरो की बानी है तू हिंदुस्तान की मिट्टी तू गंगा जी का पानी है धरोहर है तू अविरल है लड़कपन है जवानी है तुझे गीतों में ढालू तो सवैया छंद लगती है तुझे दोहा बनाऊ तो तू मुक्तक बन्द लगती है तुझे आँखों में जो ढूंढू तू चपला सी रवानी है तू मेरे माँ की है ममता मेरे नाना की नानी है लिखेगा क्या कोई तुझको तू कविता है कहानी है सरलता से तुझे समझू तो गलियों से गुजरती है अहिंसा की तू है ज्योती प्रकाशित जग को करती है समझ लो ऐ जगत वालों ये भारत माँ की बिंदी है यही भारत की गरिमा है यही जग भर की हिंदी है यही दिन भर उजाला है यही रातों की रानी है इसी पर ज्योति गर्वित है यही जिंदगानी है लिखेगा क्या कोई तुझको तू कविता है कहानी है ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

मान बढ़ाती हिंदी

 हिंदी दिवस देश का मान बढ़ाती हिंदी मधुर है जिसकी भाषा अंतरमन जिसकी महिता प्रेम लिप्त कंकड़ में जिसके मधुर देश की सरिता संस्कृत से उत्पन्न हुई और विद्यमान है जग भर में ऐसी सुंदर रसिक पंक्ति में प्रस्तुत है हिंदी कविता भक्तिकाल की भाषा हिंदी भारत की अभिलाषा हिंदी विद्वानों की जिज्ञासा हिंदी जीवन की मृदुभाषा हिंदी गौरवमय की ज्ञान है हिंदी भारत की पहचान है हिंदी देवताओं का वरदान है हिंदी काल से भी बलवान है हिंदी अद्भुत छवि दिखलाती हिंदी जीवन सफल बनाती हिंदी स्वप्नों के महल सजाती हिंदी छन्द अनेकों बतलाती हिंदी ब्रजभाषा और अवधी बोली मगही कन्नौजी और मैथिली भोजपुरी मालवी और बघेली ज्ञान बिखेरे हिंद की बोली आदि आदि की खोज है हिंदी ज्योति समर्पित रोज है हिंदी नही किसी पर बोझ है हिंदी गर्व कराती प्रतिभोज है हिंदी ऊँचे शिखर चढ़ाती हिंदी सुंदर तस्वीर मढ़ाती हिंदी प्रेम का पाठ पढ़ाती हिंदी देश का मान बढ़ाती हिंदी ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

मेरा हिंदुस्तान

 काव्य प्रभा मंच 13-08-2021 विषय - ये मेरा हिंदुस्तान है शीर्षक- मेरा हिंदुस्तान तुर्की अफगानी ने हमको लूटा मित्र बना कर के हम रहे अतिथि सत्कारों में वो गए इत्र लगा कर के फिर भी अपनी यही भावना अतिथि सदा भगवान है प्रेम व्याप्त है जन - जन में ये मेरा हिंदुस्तान है अंग्रेजों ने हृदय टटोला घात लगाया फिर कुछ बोला मूक बधिर के जैसे हम दिखने में बिल्कुल ही भोला आँखों से दया छलकती अपनी अलग पहचान है प्रेम व्याप्त है जन - जन में ये मेरा हिंदुस्तान है कण कण में शंकर रहते हैं रोम रोम में राम हैं भक्ति भाव और परोपकार में पूरे चारों धाम हैं यही बसा है संस्कारों में यही ज्योति स्वाभिमान है प्रेम व्याप्त है जन - जन में ये मेरा हिंदुस्तान है हरित क्रांति और अगस्त क्रांति हम दोनों की पूजते हैं अपने अधिकारों के खातिर दिल-ओ-जान से जूझते हैं छल और कपट नहीं है हम में इससे हम अंजान हैं प्रेम व्याप्त है जन - जन में ये मेरा हिंदुस्तान है गर्व है हमको देश पर अपने इसमें बसती जान है यही हमारा तन- मन- धन यही हमारी शान है तो फिर ज्योति कहे ना क्यूँ मेरा भारत महान है आओ हम सब मिलकर बोलें ये मेरा हिंदुस्तान है ज्य...

अतीत

अतीत मेरे अतीत की दुनिया है तू , तेरे अतीत का किस्सा हूं मै। मेरी जिंदगी का हिस्सा है तू , तेेरी जिंदगी का हिस्सा हूं मै।। पल जो बीते संग वाले , याद अब आये बहुत। पास रह कर ना सताया , अब तू क्यूं सताये बहुत।। तेरे अतीत का प्रभात हूं मै , मेरे अतीत की दिशा है तू । तेरी जिंदगी का हिस्सा हूं मै , मेरी जिंदगी का हिस्सा है तू । जो गुनगुनाए अब तलक , वो गीत मेरे नाम के । अब याद भी आऊं बहुत , तो याद अब किस काम के ।। मेरे अतीत की कहानी है तू , तेरे अतीत का किस्सा हूं मै । मेरे जिंदगी का हिस्सा है तू , तेरे जिंदगी का हिस्सा हूं मै । मेरे अतीत की दुनिया है तू । तेरे अतीत का किस्सा हूं मै । ।। ज्योति प्रकाश राय ।।

खगराज जटायू

 वीर जटायू के जीवन का वर्णन करो तुम्ही हे राम तुम्ही अहिल्या के उद्धारक तुम्ही वृद्ध सबरी के धाम ज्योति कलम की आभा के तुम्ही सुबह दोपहर शाम तुम्ही प्रमाणित करते हो वीर जटायू  रावण संग्राम सुनकर सिया विलाप जटायू हुन्कार भरे नभ में छाए त्रैलोक विजेता रावण पर सिया हरण आरोप लगाए कहा जटायू हे रावण क्या यही भुजाओं में बल है कपटी बन हरण करे नारी का यही शक्ति प्रबल है लानत है बीस भुजाओं पर इन पर गुमान क्या करना मर चुके नेत्र से तुम मेरी कायर तुझसे रण क्या लड़ना अट्टहास करता रावण तू मुझको आज डराता है मेरे प्रांगण में रहकर मुझ पर ही रौब जमाता है चल चल रे निर्बल तू खग है मै तुझको छोड़ रहा तेरा मर्दन क्या करना क्यू मौत से नाता जोड़ रहा पर्वत समान काया लेकर पंखों से वायु झकोरे हैं अरुण पुत्र वीर जटायू रावण को आज बटोरे हैं इस तरह प्रहार किया खग ने विजय पताका टूट गया शक्ति हीन समझा जिसको वह शक्ति वेग से लूट गया कानों के कुंडल टूट गिरे रावण ओझल घबराया है आज दसानन प्रथम बार ऐसे खग से टकराया है कर के सचेत बोला पक्षी ऐ रावण काल बनी सीता खर दूषण से समझ ले तू है राम प्रिया जननी सीता सुंदर नयनों वाल...

ग़जल

 ना जीने की तमन्ना है ना मरने का बहाना है किस तरह करू रुखसत अपना ही बेगाना है ऐ मेहताब बता दे तू क्या हिज्र बताऊँ मैं हो गया हू मै खाली अब लुट रहा खजाना है सुनता न कोई दिल की दिलदार भले हैं सब पागल हो कर फिरता हर सख्स दिवाना है मेरे यार जरा सुन ले यह दौर फरेबी है लूटे है वही तुझको जिसे यार बचाना है अब तो छिप जा ऐ आफताब बादलों में किसे तेरी जरूरत है औ किसे जगाना है शहर की क्या गलती वो कहा सिखाया कुछ सीखे हैं लोग खुदी कहा आग लगाना है ना जाने क्यूँ लगती यह तस्वीर तेरी प्यारी हर सख्स खिंचा आता क्या दर्द मिटाना है रूठा है खुद का दिल खुद के ही दिल से ऐ ज्योति दिल-ए-नादा आलम ये सयाना है ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश

हिंदी में हस्ताक्षर

हिंदी भाषा हमारे जीवन की अभिन्न हिस्सा है, जिसके बिना इस जीवन की कल्पना कर पाना भी असम्भव है। कहने का तात्पर्य यह है कि हम भले ही भारत के किसी भी प्रांत में हों और अपने क्षेत्रीय भाषा के आधार पर ही अपनी सर्व शिक्षा संपन्न कर लें। किंतु बिना हिंदी जाने हम भारत को नहीं जान पायेंगे, और जब हम अपने भारत को ही नहीं जान पायेंगे तो फिर हम शिक्षित कैसे कहलाएंगे। इसलिए हिंदी बोलना, हिंदी पढ़ना और हिंदी लिखना अनिवार्य है। और होना भी चाहिए, क्योंकि हम जिस देश में रहते हैं जहाँ हमारा जन्म हुआ है वह देश हिंदुस्तान कहलाता है। हिंदी भाषा हम भारत वासियों की धरोहर है जिसे हमारे पूज्य पूर्वजों ने परम्परा के अनुसार हमारी संस्कृति में इस तरह से पिरोया है की हम इसे अपनी सामाजिक सभ्यता का स्वरूप मानते हैं। जब बात हमारी संस्कृति और संस्कारों की आए तो हमारे मस्तिष्क में देवभाषा संस्कृत अपने आप ही परिक्रमा करने लगती है। भले ही हम संस्कृत पढ़ने या समझने में असहज महसूस करते हैं किंतु सत्य तो यही है कि हिंदी की उत्पति संस्कृत भाषा से ही हुई है। और हम अपनी इस मातृभूमि की धरोहर हिंदी को आज अलग - अलग प्रांतों में भिन...

उपकार

मुक्तक ऋण चुका ना सकू आपके प्यार का मै भुला ना सकू वक़्त उपकार का आपकी है कृपा जो यहा हू खड़ा आपके सामने मै ना अधिकार का आप मेरे गुरू आप ज्ञाता हुए आप ही प्रेरणा आप दाता हुए आपकी नीतियों से मिला है बहुत आप ही भाग्य के भी विधाता हुए दीन दुखियों का मै भी सहारा बनू बह चुकी नाव का मै किनारा बनू कर सकू प्यार उपकार मै भी कहीं हो कृपा इस तरह शिष्य प्यारा बनू माँ की ममता मिली पितु का प्यार है मिला गुरु की भक्ती मिली हिय का द्वार है खुला ना भूल सकता हूँ मै प्रभु के उपकार को ध्यान आपका किया जीवनाधार है मिला सूर्य को जान लू चंद्र पहचान लू वायु को कैद कर द्रव्य संज्ञान लू ज्योति माना प्रभू गुरु का उपकार है आप गुरु में बसे आज यह मान लू ज्योति प्रकाश राय

राम

 रघुवंश शिरोमणि शीलता, सालीनता तुम्ही हो राम विश्वामित्र की यज्ञ रक्षा, मारीच दीनता तुम्ही हो राम हे राम तुम्ही पाषाण के, हर कण कण मे व्यापित मिथिला नगर की सोभनीय, सुंदरता तुम्ही हो राम जनकपुर की जनक पुत्री, सीता के हिय का प्रेम हो शिव धनुष विदारक, ऋषि मद संहारक तुम्ही हो राम तुम्ही लखण की शक्ति हो, तुम्ही भरत की भक्ति हो तुम्ही शत्रुघ्न धर्म रथ, मंथरा की मंत्रणा तुम्ही हो राम माँ कौशल्या के मोह तुम ही, कैकई विद्रोह तुम ही सुमित्रा उर्मिला धैर्य तुम, पिता वियोग तुम्ही हो राम तुम ही वन गमन का रास्ता, तुम चित्रकूट से वास्ता तुम पंचवटी की कथा, सिया हरण भी तुम्ही हो राम तुम्ही जटायू मोक्ष दाता, तुम्ही सबरी भाग्य विधाता तुम्ही सुग्रीव की मित्रता, बालि हंता तुम्ही हो राम तुम्ही उदधि की माप हो, तुम्ही विभीषण संताप हो तुम्ही लंक विध्वंस हो, हनुमान हिय तुम्ही हो राम तुम्ही घातिनि ब्रह्म शक्ति, तुम्ही संजीवनी रूप हो  मेघ रावण मोक्ष तुम हो, लंका पराजय तुम्ही हो राम तुम्ही जगत में व्याप्त हो, तुम्ही मोक्ष को प्राप्त हो तुम्ही ज्योति की प्रेरणा, प्रकृति प्रदाता तुम्ही हो राम रघुवंश शिरोमणि...

बादल

आज बारिश की बूंदें मेरे तन पर पड़ी याद आ गई मुझको अपनी बीती घड़ी समय से पहले मै उस जगह आ चुका था मोहब्बत में उस दिन बादल भी झुका था इंतजार में तुम्हारे था निगाहें बिछाए हर तरफ लोग दिखते ना मन में समाए अचानक से आई एक आहट तुम्हारी दिखी एक झलक और मुस्कान प्यारी मै उठ कर तुम्हारी तरफ यार धाया तुमसे मिलकर तुम्हें घड़ी को दिखाया चले साथ हम तुम यूं हाथों को पकड़े कोई जंजीर जैसे हम दोनों को जकड़े मंच कैडवरी हमने तुमको खिलाया हमे तुमने मोहब्बत से पानी पिलाया कुछ बातें हुई फिर गले हम मिले हमें  देखकर  मेघ के  दिल जले वो आंखें दिखा कर हम पर चिल्लाए एक छतरी में हम तुम खुद को छुपाये लगे ऐसे जैसे बरसात का महीना फिर भी आने लगा दोनों को पसीना ना हमको वहां फिर कोई भी पुकारे झम – झम बरसते थे बादल बेचारे नहीं भूल सकता वो बरसात प्यारी इन निगाहों में छाई तुम्हारी ख़ुमारी आ जाओ हमदम यह ज्योति फिर पुकारे मै जिंदा हूं अब तक बस तुम्हारे सहारे ज्योति प्रकाश राय

लक्ष्य

धैर्य नहीं खोना है हमको, डिगा नहीं सकता कोई विचलित नहीं हृदय होगा तो, झुका नहीं सकता कोई आओ जाने रण कौशल में, लक्ष्य को जिसने पाया है नरेंद्र दत्त आत्मज्ञान पा कर, विवेकानंद कहलाया है पराधीन भारत को जिसने, विश्व जगत में खड़ा किया आध्यात्म दिखाकर भारत गौरव, अन्य देश से बड़ा किया लक्ष्य एक जब- जब होगा, तब-तब सब आनंद मिलेगा सम्मानित होगा जन-जन में, पुनः विवेकानंद मिलेगा लक्ष्य एक था भिलनी सबरी, राम दरश की प्यासी थी हार नहीं मानी जीवन में, दुखिया भले उदासी थी दरश दिये श्री राम गहन (वन) मे, लक्ष्य प्राप्त सबरी धायी अडिग रहो बस ध्येय बनाकर, अवश्य मिलेंगे रघुराई लक्ष्य बनाया आजाद भगत ने, हंस कर फंदे को चूम गए उसी लक्ष्य को पूरा करने, गांधी जी पैदल घूम गए लक्ष्य नेक हो नेक पथिक हो, जनसमूह आ जाएगा विचलित मन दर-दर भटकेगा, खुद ही खुद को खा जाएगा लक्ष्य बनाया जब अर्जुन ने, मत्स्य नयन को भेद गये लक्ष्य बनाया वसुदेव कृष्ण ने, अधर्म धरा से खेद गये आओ मिलकर संकल्प करें, हमें लक्ष्य को पूरा करना व्यर्थ नहीं है अपना जीवन, प्रकाश हृदय में भरना है ज्योति प्रकाश राय भदोही उत्तर प्रदेश- 221309

हौसला

 हिम्मत के बल पर हिमालय झुका है विद्या के धन पर विद्यालय टिका है हौसला नहीं टुटा था थे भीम गदाधारी कौरव हुए पराजित दुर्योधन को लात मारी उम्मीद थी संजोये शबरी के राम आए विश्वास प्रेम भक्ति में जूठे भी बेर खाए हौसला नहीं डिगा था प्रह्लाद का कभी भी विफल हुआ था कश्यप जल्लाद थे सभी भी विश्वास भर के रग में आगे बढ़ी थी रानी फिरंगी को पस्त करके पिला दिया था पानी हौसला नहीं था टूटा राणा लड़े लड़ाई खा कर के घास रोटी शत्रु पर किए चढ़ाई सेना भले ही कम थी हिम्मत की ना कमी थी शिवा क्षत्रपति थे मां भवानी की सर ज़मी थी अंधेरों को चीर कर के दिया करे उजाला हमने प्रयत्न कर के हिमालय समेट डाला हौसला रहेगा हममे हम जंग जीत लेंगे अपनों के साथ होकर हर रंग प्रीत लेंगे आओ करें हम मिलकर ज्योति संग इरादा पिछले प्रयत्न से भी होगा प्रयत्न ज्यादा ज्योति प्रकाश राय भदोही उत्तर प्रदेश 8879648743

पश्चाताप

  पश्चाताप (भाग -1) मुख्य किरदार ममता, संजीव सहायक किरदार तमन्ना, विनय, विकास, इत्यादि। ममता - संजीव तुम बैठो मैं चाय बनाकर लाती हूं। (रसोई घर से) ओ हो माफ करना संजीव अभी - अभी गैस खत्म हो गया सिर्फ पानी ही गर्म हुआ था , चलो आज हम लोग पास वाले चाय के टपरी से चाय पीते हैं वहां ताजी हवाओं का भी आनंद मिलेगा। संजीव - अभी नहीं ममता जी आप बैठिए मै बस अभी - अभी खाना खा कर आ रहा हूं। शाम को चलेंगे वहां चाय पीने और ठंडी हवाओं का लुत्फ उठाने। ममता - ठीक है अच्छा! बैठो मै तुम्हारे लिए एक पत्रिका रखी हूं उसे पढ़कर तुम्हे अच्छा लगेगा। (संजीव को पत्रिका देते हुए) पता है यह पत्रिका मेरे जीवन की अत्यंत महत्वपूर्ण पत्रिका है क्योंकि यह सौवीं (सतक) पत्रिका है जिसे देखकर मै इतना खुश हुई थी कि मानों मेरे मन को दो पल के लिए हर ग़म से आजादी मिल गई हो और मै दुनिया के हर अच्छे - बुरे कर्म को छोड़ मात्र खुशी भरे नेत्रों से ओझल और खुद में सराबोर हो रही थी। संजीव - इतना कुछ क्या है इस पत्रिका में ? जो आप बताते हुए भी इतना तनावमुक्त है और किसी विशेष पल का आनंद प्राप्त कर रही हैं। (पत्रिका पढ़ने पर) अरे वाह मम...