Skip to main content

पुलवामा अटैक

अपने हौसलों को कमजोर ना समझो, इनमें जज्बा है कुछ कर दिखाने का

वक्त आए तो गर्व से कहना, हममें हिम्मत है जाँ लुटाने का

ऐ भारत माँ तेरे चरणों की सौगंध,

गर कोई तेरी ओर आँख भी उठाए, तो हममें हिम्मत है उसकी हस्ती मिटाने का


दुश्मनों को घर तक खदेड़ आने का हौसला हममें है

देश पर शौक से मिट जाने का हौसला हममें है

याद रखो पाक के नापाक जवानों, तुम्हे मिट्टी में मिलाने का हौसला हममें है

कारगिल का दौर फिर से दोहराने का हौसला हममें है

फिर लाहौर तक चढ़ जाने का हौसला हममें है


मंजर क्यूँ आज भयावह है, क्या यही शांत कश्मीर है

हम तो वीरों में वीर बड़े, क्या लाशें ही जागीर हैं

जिन हसी वादियों में खिलती, पवित्र प्रेम की कलियाँ है

है धरा वहाँ क्यूँ लाल रंग, बिखरी बिछड़ी सब गलियाँ है

हम तो देते संदेश प्रेम का, क्या उन्हें नही लेना आता

या जिस संदेश को वो पहचाने वो हमें नही देना आता

हम भी तो ज्ञान बाटते हैं, क्यूँ ना उनको हम पहचाने

आखिर कब तक मित्र कहें, हरकत क्यूँ ना हम जाने

ऐ भारत माँ के वीर जवानों, चालीस को कैसे खो बैठे

कारगिल की याद दिलाओ उनको, जो छुपे वहाँ ऐठे-ऐठे

लश्कर के हो या हिजबुल के, है तो कायर और गीदड़ ही

है जाति पाक नामर्दों की, नामर्दों में भी लीचड़ ही

बलिदान व्यर्थ ना हो जाए, भारत के वीर जवानों का

आतंक मचा कर आतंक मिटा दो, संहार करो शैतानों का

अब कमर नही सर को फोड़ो अजहर आतंक मिटा डालो

है भारत माँ की आन तुम्हे, पाकिस्तान मिटा डालो

आग लगा कर आग बुझाओ, जो धधक रही है सीने में

जब तक ना लहरे लाहौर तिरंगा, है मजा नही अब जीने में।। 


ज्योति प्रकाश राय, (भदोही, उत्तर प्रदेश) 

Comments

Popular posts from this blog

होली 2020

आप सभी को रंगो और उमंगो से भरे त्यौहार , होली की ढेर सारी शुभकामनायें  होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!  !! ज्योति प्रकाश राय !!

बिछड़े रास्ते

 कर रहे थे कत्ल वो सर-ए-आम बाजार में खून की प्यासी दिखी हर चमक तलवार में गिर रहा था सिर कहीं धड़ कहीं पर गिर रहा लेकर बहू ,बेटियों को बाप पागल फिर रहा आतंक का यह शोर था शोर था यह काफ़िरों का मिलता नहीं था रास्ता झुंड था मुसाफिरों का छीन कर भी बन गए वो हमदर्द सारे हिन्द के जो नहीं बोले कभी जय हिंद गुरु गोविंद के भर पेट उनको रोटियाँ देता रहा हिंदोस्तां उनके दिलों में पल रही कुरीतियाँ पाकिस्तां गलतियाँ कर के भी वो ताज पहनाये गए हिंद-ए-वतन के वास्ते घर सभी जलाये गए वो जुर्म की सीमा सभी लाँघ कर बागी हुए तब हिंदुस्तां के जांबाज भी देश में दाग़ी हुए भ्रष्ट होता देख सब करवट लिया फिर देश ने देख कर फिर पात्रता गद्दी दिया उपदेश में राज अब तेरा चले कश्मीर - कन्या छोर तक कर ले जहाँ को कैद तू देख चारों ओर तक हो गए हैं सब सजग ईश्वर भी तेरे साथ है सब पर चढ़ा है रंग भगवा तेज तेरे माथ है झुक रहे हैं वो सभी जो देश को थे खा रहे एक-एक कर के सभी मिटते हुए हैं जा रहे माफ़ी नहीं उनको मिले जो खा गए इंसानियत दण्ड उनको चाहिए जो फैला रहे हैवानियत ज्योति उज्ज्वल हो रहा अपने वतन के वास्ते मिल गए हैं फिर सभी को ...

स्त्रीयों का द्वेष

(इसमें तीन स्त्रियाँ सही हैं, तो तीन स्त्रियाँ गलत भी हैं) एक औरत ही औरत के दुःख का कारण होती हैं वह खुद ही द्वेष बढ़ाती हैं खुद ही बैठ के रोती हैं जब तक माँ बेटी होती हैं हर कष्ट खुशी से सहती हैं बन गयी बहू तो फिर सातवें आसमान पर रहती हैं दिन रात पहाड़ा पढ़ती हैं और नही चैन से सोती हैं वह खुद ही द्वेष बढ़ाती हैं खुद ही बैठ के रोती हैं एक बहू के आने से सास बन गयी सभी में ख़ास सास कहे बात सुनो कहूँ भला क्या जूना इतिहास अपमानित कर स्त्री को ईर्ष्या के बीज वो बोती हैं वह खुद ही द्वेष बढ़ाती हैं खुद ही बैठ के रोती हैं ननद बनी वह भी स्त्री भाभी बनी जो वह भी स्त्री देवरानी बनी वह भी स्त्री जेठानी बनी वह भी स्त्री बात करें वो बढ़ चढ़ कर आप ही आपा खोती हैं वह खुद ही द्वेष बढ़ाती हैं खुद ही बैठ के रोती हैं इतिहास गवाह है युग युग से एक से दो यदि हो जाएं भगवान ही जाने दिन बीते रात शान्ति से सो जाएं गांधारी द्रौपदी सिया सुपर्णखा सुरुचि सुनीति होती हैं वह खुद ही द्वेष बढ़ाती हैं और खुद ही बैठ के रोती हैं यदि स्त्री स्त्री को समझे परिवार नही फिर बिगड़ेगा स्नेह - प्रेम घर बरसेगा और स्वर्ग धरा पर उतरे...