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मान बढ़ाती हिंदी

 हिंदी दिवस


देश का मान बढ़ाती हिंदी


मधुर है जिसकी भाषा अंतरमन जिसकी महिता

प्रेम लिप्त कंकड़ में जिसके मधुर देश की सरिता

संस्कृत से उत्पन्न हुई और विद्यमान है जग भर में

ऐसी सुंदर रसिक पंक्ति में प्रस्तुत है हिंदी कविता


भक्तिकाल की भाषा हिंदी

भारत की अभिलाषा हिंदी

विद्वानों की जिज्ञासा हिंदी

जीवन की मृदुभाषा हिंदी


गौरवमय की ज्ञान है हिंदी

भारत की पहचान है हिंदी

देवताओं का वरदान है हिंदी

काल से भी बलवान है हिंदी


अद्भुत छवि दिखलाती हिंदी

जीवन सफल बनाती हिंदी

स्वप्नों के महल सजाती हिंदी

छन्द अनेकों बतलाती हिंदी


ब्रजभाषा और अवधी बोली

मगही कन्नौजी और मैथिली

भोजपुरी मालवी और बघेली

ज्ञान बिखेरे हिंद की बोली


आदि आदि की खोज है हिंदी

ज्योति समर्पित रोज है हिंदी

नही किसी पर बोझ है हिंदी

गर्व कराती प्रतिभोज है हिंदी


ऊँचे शिखर चढ़ाती हिंदी

सुंदर तस्वीर मढ़ाती हिंदी

प्रेम का पाठ पढ़ाती हिंदी

देश का मान बढ़ाती हिंदी


ज्योति प्रकाश राय

भदोही, उत्तर प्रदेश

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होली 2020

आप सभी को रंगो और उमंगो से भरे त्यौहार , होली की ढेर सारी शुभकामनायें  होलिका दहन हुई, प्रह्लाद अग्नि बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! ध्रुव को तार-तार किया, किसी अहंकार ने ॐ हरी-हरी तब, लगे ध्रुव पुकारने प्याला हरी नाम पिये, बैठे धरा बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! विष्णु ज्ञान राग भरे, नभ में जगमगा रहे मय के अहंकार में, मनुष्य डगमगा रहे प्रगति सीधे हाँथ में, आड़े हाँथ खींच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !! आओ सभी भस्म करें, अपने-अपने पाप को ज्योति प्रज्वलित करें, ज्योति से मिलाप को आज फिर प्रमाण मिला, सत्य सबके बीच रहे ! भक्त वो मिटे कहाँ, प्रभू जिसे सींच रहे !!  !! ज्योति प्रकाश राय !!

बिछड़े रास्ते

 कर रहे थे कत्ल वो सर-ए-आम बाजार में खून की प्यासी दिखी हर चमक तलवार में गिर रहा था सिर कहीं धड़ कहीं पर गिर रहा लेकर बहू ,बेटियों को बाप पागल फिर रहा आतंक का यह शोर था शोर था यह काफ़िरों का मिलता नहीं था रास्ता झुंड था मुसाफिरों का छीन कर भी बन गए वो हमदर्द सारे हिन्द के जो नहीं बोले कभी जय हिंद गुरु गोविंद के भर पेट उनको रोटियाँ देता रहा हिंदोस्तां उनके दिलों में पल रही कुरीतियाँ पाकिस्तां गलतियाँ कर के भी वो ताज पहनाये गए हिंद-ए-वतन के वास्ते घर सभी जलाये गए वो जुर्म की सीमा सभी लाँघ कर बागी हुए तब हिंदुस्तां के जांबाज भी देश में दाग़ी हुए भ्रष्ट होता देख सब करवट लिया फिर देश ने देख कर फिर पात्रता गद्दी दिया उपदेश में राज अब तेरा चले कश्मीर - कन्या छोर तक कर ले जहाँ को कैद तू देख चारों ओर तक हो गए हैं सब सजग ईश्वर भी तेरे साथ है सब पर चढ़ा है रंग भगवा तेज तेरे माथ है झुक रहे हैं वो सभी जो देश को थे खा रहे एक-एक कर के सभी मिटते हुए हैं जा रहे माफ़ी नहीं उनको मिले जो खा गए इंसानियत दण्ड उनको चाहिए जो फैला रहे हैवानियत ज्योति उज्ज्वल हो रहा अपने वतन के वास्ते मिल गए हैं फिर सभी को ...

हिन्दुस्तान की मिट्टी

ये हिन्दुस्तान की मिट्टी है, मां के नाम से जानी जाती है इसको छू कर वीर सपूतों की, धड़कन पहचानी जाती है धरती को मां संबोधित कर, गर्व कराता है भारत चिकनी दोमट बलुई काली, पर्व मनाता है भारत इस पर आंच न आने पाए, बंदूकें तानी जाती हैं ये हिन्दुस्तान की मिट्टी है, मां के नाम से जानी जाती है गीता कुरान गुरुग्रंथ बाइबिल,सब कुछ भारत अपनाया है जब जब दुश्मन खड़ा हुआ, मिट्टी में उसे मिलाया है सरहद पर महके जो खुशबू, वीरों से पहचानी जाती है ये हिन्दुस्तान की मिट्टी है, मां के नाम से जानी जाती है