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सपना और हकीकत

आज फिर मेरे सपने में माँ आ गई

हर एक बात पर बहुत कुछ समझा गई


मै भी सपनों में खोया नींद भर सोता रहा

बचपन की तरह आज भी जिद कर के रोता रहा


माँ की नजर में बेटा बच्चा ही रहता है

वो चाहे लाख बुरा क्यूँ ना हो अच्छा ही रहता है


आज एक सवाल पर माँ बहुत कुछ सिखा गई

मुझे सपनों में भी आईना दिखा गई


सवाल ये था मेरा की मेरा प्रेम किसी और से भी जुड़ गया है

कुछ इधर तो कुछ उधर भी मुड़ गया है


माँ ने कहा वो किसी की बेटी है खिलवाड़ मत करना

दिल बहलाने के लिए ऐसा जुगाड़ मत करना


वो किसी की इज्जत है किसी के दिल का टुकड़ा होगी

पसंद यदि तेरी है तो चाँद का मुखड़ा होगी


मेरी तुझसे एक गुजारिश है तू उससे ये बोल देना

वो घर की दहलीज का भी खयाल रखे ये तोहफा अनमोल देना


अचानक से मेरी आँख खुली सवेरा हो गया था

बड़ा ही खूबसूरत था वो सपना जिसमें मै खो गया था


संदेश ये है दुनिया को ज्योति प्रकाश के जरिए

सपना हो या हकीकत खिलवाड़ मत करिए

ज्योति प्रकाश राय

Event vashi Oct. 2019

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