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महाकुम्भ गीत

तीर्थों में राजा प्रयाग, जहाँ कुम्भ मेला लगे पुण्यों का है भण्डार जहाँ कुम्भ मेला लगे भरद्वाज ऋषि का आश्रम सोहे नागवासुकी, अक्षय वट मोहे मोहे अंजनी कुमार, जहाँ कुम्भ मेला लगे तीर्थों में राजा प्रयाग o..........!  जहाँ पे बहती गंगा जी की धारा यमुना जी का मिलेगा किनारा सरस्वती करें उपकार, जहाँ कुम्भ मेला लगे तीर्थों में राजा प्रयाग o..........!  बारह वर्ष पे महाकुम्भ लगता कल्पवास से संगम तट सजता भीड़ होती है अपरम्पार, जहाँ कुम्भ मेला लगे तीर्थों में राजा प्रयाग o..........!  देशी भी आते विदेशी भी आते शासन प्रशासन भी गोता लगाते देवताओं की होती बहार, जहाँ कुम्भ मेला लगे तीर्थों में राजा प्रयाग o..........! धर्म सनातन भूल मत जाना आना जी आना बच्चे भी लाना करे ज्योति विनती हजार, जहाँ कुम्भ मेला लगे तीर्थों में राजा प्रयाग, जहाँ कुम्भ मेला लगे पुण्यों का है भण्डार जहाँ कुम्भ मेला लगे ज्योति प्रकाश राय भदोही, उत्तर प्रदेश